धर्म शत्रुओं की गुलामी करता हिंदू

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 धर्म शत्रुओं की गुलामी करता हिंदू



क्या कभी देखा है आपने अपने परिवार के अपने समाज के शत्रु की सेलिब्रेशन करते हुए गुलामी करना?

हिंदुओं में अधिकतर लोग ऐसे हैं जो मानसिक रूप से आज भी गुलाम है भले ही भारत अमृत महोत्सव मना रहा है आजादी का लेकिन अंग्रेजों की वह गुलामी आज भी पूरी शिद्दत के साथ कर रहा है

जिन अंग्रेजो ने हमारे देश को लूटा हमारे देश को गुलाम बनाए रखा देशवासियों को अनवरत यातनाएं दी अनगिनत भारतीयों को मौत के घाट उतारा भारत आज उन्हीं अंग्रेजों का नववर्ष जोर शर से मना रहा है।

हिंदू जिन्हें खत्म करने के लिए मिशनरियां लगातार कार्यरत है, ईसाई मिशनरी जो हिंदू धर्म को पूरी तरह नष्ट कर देना चाहती हैं जिन्होंने हमारे पूर्वजों को प्रताड़ित किया, उनके साथ जानवरों से भी बुरा बर्ताव किया ,उन्हें अपने धर्म का पालन तक नहीं करने दिया शास्त्रों के साथ जिंदा जला दिया औरतों के स्तन काटे महिलाओं का सरेआम बलात्कार किया , आज वही निर्लज्ज हिंदू अंग्रेजी नववर्ष मना रहे हैं, क्रिसमस मना रहे हैं। 

ऐसा और किसी कौम में कभी कोई करता नजर नहीं आएगा। और इसीलिए हिंदू ही वो कौम है जो सिमटती जा रही है। क्योंकि जो कौम अपना इतिहास भूल जाती है वो कौम खुद इतिहास बन जाती है।

आश्चर्य की बात तो यह है कि जो बुद्धिजीवी हिंदू परंपराओं और हिंदू त्योहारों में विज्ञान खोजते हैं वह इस प्रकार के फूहड़ कथित आधुनिक त्योहारों को मनाते समय उसके पीछे न विज्ञान खोजते हैं ना ही इतिहास खोजते हैं बस बिना सोचे समझे मूर्खता बस उन्हें फॉलो करके अपनी गुलाम मानसिकता का परिचय देते हैं।

अनेकों हिंदू उन चर्चों में भी जाते हैं जिन चर्चों के निर्माण का उद्देश्य एक ही है ईसाइयत फैलाना और ईसाइयत फैलाने के लिए सनातन धर्म को नष्ट करना ही होगा और यह काम अनवरत सैकड़ों वर्षो से करते आ रहे हैं।

बात करें भारत के ही एक राज्य मेघालय की जहां ईसाई बहुसंख्यक है, वहां हिंदुओं का जीवन नर्क से बदतर बन चुका है वह हिंदुओं को धार्मिक स्वतंत्रता नहीं या यह कहें कि वहां हिंदुओं को जीने का अधिकार तक नहीं वहां हिंदुओं को मारा पीटा जाता है लूटा जाता है हिंदू महिलाओं के साथ खुलेआम दुष्कर्म होते हैं क्योंकि वहां हिंदू अल्पसंख्यक हैं। और जहां हिंदू बहुसंख्यक है वहां मूर्खों की भांति इन मिशनरियों के षड्यंत्र में फंस रहे हैं जिसका परिणाम यह होगा कि आने वाले समय में वह अल्पसंख्यक होंगे और वही होगा जो उनके साथ मेघालय में हो रहा है

अब भी समय है, हिंदुओं अपने धर्म को समझो उसका अनुसरण करो उसका अनुपालन करो और प्रचार-प्रसार करो अन्यथा वह समय दूर नहीं जब हम अपने ही देश में अल्पसंख्यक हो जाएंगे और हमारी आने वाली पीढ़ियां अपने ही धर्म का पालन नहीं कर पाएंगे या तो धर्म अंतरित हो जाएंगे या घुट घुट कर जीने के लिए मजबूर होंगे

आपका चयन ही आप का परिणाम बनेगा इसलिए सही चयन करना सीखो ताकि उत्तम परिणाम मिले हमारा नव वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को आता है।

हम एक बार गुलामी भुगत चुके हैं यदि अब भी हमने इस गुलाम मानसिकता को नहीं छोड़ा तो बहुत जल्द हम उन्हें अपने ही देश में गुलाम बन जाएंगे और इसके बाद वह गुलामी कभी खत्म नहीं हो पाएगी क्योंकि इस बार हमें गुलाम बनाने वाले कोई गलती नहीं करेंगे और हमें कोई अवसर नहीं देंगे उस गुलामी से छूटने का और हां अब तो कोई भगत सिंह सुभाष चंद्र सरदार पटेल ही पैदा नहीं होने वाले


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